लोकसभा क्या है
लोकसभा भारत की संसद का निचला सदन है। भारत की संसद दो सदनों से मिलकर बनी है: लोकसभा (Lower House) और राज्यसभा (Upper House)। लोकसभा को "जन प्रतिनिधि सभा" भी कहा जाता है क्योंकि इसके सदस्य प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा चुने जाते हैं।
यहाँ कुछ महत्वपूर्ण बातें लोकसभा के बारे में:
सदस्यों की संख्या:
वर्तमान में लोकसभा में अधिकतम 552 सदस्य हो सकते हैं, लेकिन फिलहाल इसमें 543 निर्वाचित सदस्य होते हैं।
कार्यकाल:
लोकसभा का कार्यकाल 5 वर्षों का होता है, लेकिन इसे समय से पहले भंग भी किया जा सकता है।
नेतृत्व:
लोकसभा का प्रमुख नेता प्रधानमंत्री होता है, और इसकी अध्यक्षता लोकसभा स्पीकर करते हैं।
भूमिका:
लोकसभा कानून बनाती है, बजट पारित करती है, और सरकार की जिम्मेदारी तय करती है। अगर लोकसभा में सरकार के खिलाफ बहुमत जाता है, तो सरकार को इस्तीफा देना पड़ता है।
राज्यसभा क्या है?
राज्यसभा भारत की संसद का उच्च सदन (Upper House) है। इसे "Council of States" यानी राज्यों की परिषद कहा जाता है, क्योंकि इसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व होता है।
यहाँ राज्यसभा के बारे में कुछ मुख्य बातें:
1. सदस्यों की संख्या:
राज्यसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 250 हो सकती है।
वर्तमान में इसमें 245 सदस्य होते हैं:
233 सदस्य राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं।
12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा नामित किए जाते हैं — कला, विज्ञान, साहित्य, और सामाजिक सेवा के क्षेत्रों में विशेष योगदान के आधार पर।
2. कार्यकाल:
राज्यसभा एक स्थायी सदन है; इसे भंग नहीं किया जाता।
इसके एक-तिहाई सदस्य हर दो साल में सेवानिवृत्त होते हैं, और उनके स्थान पर नए सदस्य चुने जाते हैं।
हर सदस्य का कार्यकाल 6 साल का होता है।
3. अध्यक्षता:
राज्यसभा का अध्यक्ष भारत के उपराष्ट्रपति होते हैं।
उपसभापति (Deputy Chairman) राज्यसभा के सदस्यों द्वारा चुना जाता है।
4. भूमिका और शक्तियाँ:
राज्यसभा विधायी प्रक्रिया में लोकसभा के साथ भाग लेती है।
यह विभिन्न विषयों पर चर्चा करती है, कानून पारित करती है और बजट पर विचार करती है (हालाँकि मनी बिल यानी धन विधेयक सिर्फ लोकसभा में पेश होता है)।
राज्यसभा राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर विशेष प्रस्ताव पारित कर सकती है, जैसे कि संसद को राज्य सूची में कानून बनाने की अनुमति देना।
लोकसभा और राज्यसभा में अंतर
लोकसभा और राज्यसभा के बीच कई महत्वपूर्ण अंतर होते हैं। नीचे एक सरल तुलना दी गई है:
| बिंदु| लोकसभा. | राज्यसभा. |
|----------------------|------------------------------------------------|------
| स्थापना वर्ष. | 1952 |. 1952
| अन्य नाम. | निचला सदन | उच्च सदन |
| सदस्य चयन. | जनता द्वारा सीधे चुनाव | राज्य विधानसभाओं द्वारा |अप्रत्यक्ष चुनाव |
| सदस्य संख्या| 552, वर्तमान में 543 |250, वर्तमान में लगभग 245
| कार्यकाल | 5 वर्ष | स्थायी सदन — 6 साल कार्यकाल, हर 2 साल में 1/3 सदस्य रिटायर |
| अध्यक्ष|. लोकसभा अध्यक्ष | उपराष्ट्रपति (राज्यसभा के सभापति) |
| वित्त विधेयक |
केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है | राज्यसभा इसमें संशोधन तो कर सकती है, पर अंतिम निर्णय लोकसभा का होता है |
| प्रधान भूमिका
| सरकार बनाना और गिराना | सलाहकारी और समीक्षा भूमिका |
लोकसभा और राज्यसभा में कई अंतर हैं जो भारतीय संसदीय प्रणाली में उनकी भूमिकाओं और शक्तियों को परिभाषित करते हैं।
संरचना और सदस्यता
-लोकसभा:
यह भारत की संसद का निचला सदन है, जिसमें अधिकतम 552 सदस्य होते हैं। इसके सदस्य सीधे जनता द्वारा चुने जाते हैं और उनका कार्यकाल 5 वर्षों का होता है।
राज्यसभा:
यह भारत की संसद का ऊपरी सदन है, जिसमें अधिकतम 250 सदस्य होते हैं। इसके सदस्य राज्यों के विधानसभा सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं और उनका कार्यकाल 6 वर्षों का होता है, जिसमें हर 2 साल में एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं।
शक्तियाँ और भूमिकाएँ
लोकसभा:
यह सदन अधिक शक्तिशाली है क्योंकि यह धन विधेयकों को पारित करने और सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित करने की शक्ति रखता है। लोकसभा के सदस्य सीधे जनता के प्रतिनिधि होते हैं।
राज्यसभा:
यह सदन राज्यों के हितों का प्रतिनिधित्व करता है और विशेषज्ञता और अनुभव वाले सदस्यों को शामिल करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। राज्यसभा के पास धन विधेयकों पर सीमित शक्ति है, लेकिन यह अन्य विधेयकों पर लोकसभा के साथ समान शक्ति रखती है।
अन्य अंतर
कार्यकाल:
लोकसभा का कार्यकाल 5 वर्षों का होता है, जबकि राज्यसभा स्थायी है और इसके सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्षों का होता है।
सदस्यता की आयु सीमा:
लोकसभा के सदस्य बनने के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष है, जबकि राज्यसभा के लिए यह 30 वर्ष है।
नेतृत्व:
लोकसभा का नेता प्रधानमंत्री होता है, जबकि राज्यसभा का नेतृत्व उपराष्ट्रपति करते हैं।
इन अंतरों के कारण, लोकसभा और राज्यसभा दोनों ही भारतीय संसदीय प्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाते हैं
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें