राम मंदिर अयोध्या
अयोध्या राम मंदिर भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के अयोध्या नगर में स्थित एक भव्य हिंदू मंदिर है, जो भगवान श्रीराम के जन्मस्थान (राम जन्मभूमि) पर बनाया गया है। यह मंदिर हिंदू धर्म के सबसे पवित्र स्थलों में से एक माना जाता है।
अयोध्या राम मंदिर एक प्रमुख हिंदू तीर्थ स्थल है, जो भगवान राम के जन्मस्थान के रूप में माना जाता है। आइए इसके बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें जानते हैं:
राम मंदिर का इतिहास:
इतिहास और महत्व
अयोध्या राम मंदिर का इतिहास प्राचीन काल से जुड़ा हुआ है। भगवान राम के जन्मस्थान के रूप में मानी जाने वाली इस जगह पर एक प्राचीन मंदिर था, जिसे मुगल बादशाह बाबर ने 1528 में तोड़कर बाबरी मस्जिद का निर्माण करवाया था।
प्राचीन इतिहास
: ऐसा माना जाता है कि अयोध्या भगवान श्रीराम की जन्मभूमि है। वैदिक ग्रंथों और रामायण के अनुसार, राम का जन्म यहीं हुआ था।
विवादित स्थल:
1528 में मुगल सम्राट बाबर के सेनापति मीर बाकी ने बाबरी मस्जिद का निर्माण कराया था। माना जाता है कि इसे एक पुराने मंदिर को गिराकर बनाया गया था, जिसे लेकर हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा था।
बाबरी मस्जिद विवाद
बाबरी मस्जिद के निर्माण के बाद से ही यह स्थान हिंदुओं और मुसलमानों के बीच विवाद का केंद्र बना रहा। हिंदुओं का मानना था कि यह भगवान राम का जन्मस्थान है, जबकि मुसलमानों का मानना था कि यह एक मस्जिद है।
विवाद और आंदोलन:
1949 में मंदिर-मस्जिद परिसर में भगवान राम की मूर्ति “प्रकट” हुई, जिससे विवाद और गहरा गया।
6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद को कारसेवकों द्वारा गिरा दिया गया, जिसके बाद देशभर में दंगे हुए।
इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
6 दिसंबर 1992 का विवाद
6 दिसंबर 1992 को, हिंदू कार्यकर्ताओं ने बाबरी मस्जिद को ढहा दिया, जिससे देश भर में व्यापक हिंसा और दंगे हुए।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला (2019):
9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में विवादित भूमि राम मंदिर के पक्ष में दे दी।
साथ ही, मुस्लिम समुदाय को मस्जिद निर्माण के लिए अयोध्या में ही 5 एकड़ भूमि देने का आदेश दिया गया।
न्यायालयीन निर्णय
2010 में, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बाबरी मस्जिद की जमीन को तीन भागों में बांटने का निर्णय दिया, जिसमें से एक भाग राम लला को दिया गया। 2019 में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि विवादित जमीन पर राम मंदिर का निर्माण किया जा सकता है, जबकि मुसलमानों को मस्जिद के लिए अलग जमीन दी जाएगी।
राम मंदिर निर्माण:
भूमि पूजन: 5 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूमि पूजन किया और मंदिर निर्माण की शुरुआत की।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट मंदिर निर्माण का कार्य देख रहा है।
राम मंदिर निर्माण
5 अगस्त 2020 को, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर की आधारशिला रखी। मंदिर का निर्माण तेजी से हो रहा है और यह एक प्रमुख तीर्थ स्थल बनने जा रहा है।
मंदिर की विशेषताएं:
मंदिर नागर शैली में बन रहा है।
तीन मंजिला भव्य निर्माण है, जिसमें 392 खंभे होंगे।
इसमें श्रीराम की बाल रूप की मूर्ति (रामलला) की प्रतिष्ठा की गई है।
महत्व और प्रभाव
अयोध्या राम मंदिर का निर्माण न केवल एक धार्मिक स्थल के रूप में महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को भी दर्शाता है। यह मंदिर भगवान राम के जीवन और उनके आदर्शों को भी प्रदर्शित करेगा।
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा:
22 जनवरी 2024 को श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा विधिवत रूप से हुई, जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल हुए और देशभर में उत्सव मनाया गया।
अयोध्या राम मंदिर का निर्माण एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व का विषय है। यह मंदिर न केवल भगवान राम के जन्मस्थान के रूप में महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को भी प्रदर्शित करता है।
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